
भारत में टिकटॉक (TikTok India) के प्रशंसकों के लिए एक मिश्रित खबर सामने आई है। एक ओर जहां टिकटॉक की आधिकारिक वेबसाइट पांच साल के प्रतिबंध के बाद फिर से कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ हो गई है, वहीं दूसरी ओर मोबाइल ऐप अभी भी गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है। यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उपयोगकर्ता उत्साहित हैं, लेकिन साथ ही अनिश्चितता भी बनी हुई है। क्या टिकटॉक वास्तव में भारत में अपनी वापसी (TikTok comeback) करने जा रहा है? आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।
टिकटॉक की वेबसाइट फिर से सक्रिय: क्या है इसका मतलब?
2020 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता की चिंताओं का हवाला देते हुए टिकटॉक सहित 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह निर्णय भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद लिया गया, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। उस समय टिकटॉक भारत में बेहद लोकप्रिय था, और इसके लगभग 20 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता थे। प्रतिबंध के बाद, टिकटॉक की वेबसाइट और ऐप दोनों को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था।
हाल ही में, 22 अगस्त 2025 को, कुछ उपयोगकर्ताओं ने बताया कि वे टिकटॉक की आधिकारिक वेबसाइट तक पहुंच पा रहे हैं। यह खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से X पर, तेजी से वायरल हो गई। कई उपयोगकर्ताओं ने स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें दिखाया गया कि टिकटॉक की वेबसाइट (TikTok website) भारत में फिर से काम कर रही है। हालांकि, कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह भी बताया कि वेबसाइट के कुछ पेज अभी भी काम नहीं कर रहे हैं, और यह संभवतः एक परीक्षण चरण या “फेज्ड रोलआउट” का हिस्सा हो सकता है।
भारत-चीन संबंधों में सुधार: टिकटॉक की वापसी का कारण?
टिकटॉक की वेबसाइट के फिर से सक्रिय होने की खबर ऐसे समय में आई है, जब भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात की। इन चर्चाओं में दोनों देशों ने “खुलकर और सकारात्मक” दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन की यात्रा करने वाले हैं। इन राजनयिक प्रगतियों ने यह अनुमान लगाया है कि टिकटॉक की भारत में वापसी (TikTok India comeback) संभव हो सकती है।
हालांकि, न तो भारत सरकार और न ही टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। यह अनिश्चितता उपयोगकर्ताओं के बीच उत्साह के साथ-साथ संशय भी पैदा कर रही है। क्या यह वास्तव में टिकटॉक की पूर्ण वापसी का संकेत है, या केवल एक तकनीकी परीक्षण है?
टिकटॉक के प्रतिबंध का इतिहास
टिकटॉक पर भारत में प्रतिबंध जून 2020 में लगाया गया था, जब भारत-चीन संबंध गलवान घाटी संघर्ष के कारण तनावपूर्ण थे। भारत सरकार ने दावा किया था कि टिकटॉक और अन्य चीनी ऐप्स उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत रूप से विदेशी सर्वरों पर भेज रहे थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा था। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह प्रतिबंध लगाया था। इसके परिणामस्वरूप, टिकटॉक को गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर से हटा दिया गया, और इसकी वेबसाइट तक पहुंच को भी अवरुद्ध कर दिया गया।
प्रतिबंध से पहले, टिकटॉक भारत में एक सांस्कृतिक घटना बन चुका था। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसने लाखों लोगों को रचनात्मक मंच प्रदान किया था। नृत्य, हास्य, और स्थानीय कहानियों से भरे छोटे-छोटे वीडियो ने टिकटॉक को भारत में बेहद लोकप्रिय बना दिया था। लेकिन प्रतिबंध ने कई सामग्री निर्माताओं (content creators) की आजीविका को प्रभावित किया, जिन्हें नए मंचों जैसे इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, और भारतीय ऐप्स जैसे MX TakaTak और Josh पर जाना पड़ा।
क्या टिकटॉक की वापसी संभव है?
टिकटॉक की वेबसाइट के फिर से सक्रिय होने से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह भारत में टिकटॉक की पूर्ण वापसी (TikTok comeback) का संकेत है? विशेषज्ञों का मानना है कि टिकटॉक की वापसी आसान नहीं होगी। भारत सरकार ने डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सख्त नीतियां बनाई हैं, और टिकटॉक को इनका पालन करना होगा। इसके लिए बाइटडांस को भारत में स्थानीय डेटा सर्वर स्थापित करने, डेटा गोपनीयता नियमों का अनुपालन करने, और सरकार के साथ पारदर्शी सहयोग करने की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, टिकटॉक को भारत में पहले से स्थापित प्रतिस्पर्धियों से भी कड़ी चुनौती मिलेगी। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स ने टिकटॉक की अनुपस्थिति में भारतीय बाजार पर कब्जा कर लिया है। स्थानीय ऐप्स जैसे Moj और Josh भी छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय हो चुके हैं। इन मंचों ने टिकटॉक की तरह ही छोटे-छोटे वीडियो बनाने और साझा करने की सुविधा प्रदान की है, जिससे उपयोगकर्ताओं को विकल्प मिल गए हैं।
उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
टिकटॉक की वेबसाइट के फिर से सक्रिय होने की खबर ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। X पर कई उपयोगकर्ताओं ने इस खबर को साझा किया, जिसमें कुछ ने उत्साह व्यक्त किया, तो कुछ ने इसे केवल एक तकनीकी परीक्षण बताया। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “टिकटॉक की वेबसाइट भारत में फिर से काम कर रही है! क्या यह वापसी का संकेत है?” वहीं, एक अन्य उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया, “क्या हमें वास्तव में टिकटॉक की जरूरत है, जब हमारे पास पहले से ही इतने सारे विकल्प मौजूद हैं?”
कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी बताया कि वेबसाइट तक पहुंच वीपीएन के बिना भी संभव थी, जो इस बात का संकेत देता है कि यह प्रतिबंध में ढील का परिणाम हो सकता है। हालांकि, ऐप की अनुपलब्धता ने कुछ उपयोगकर्ताओं को निराश भी किया है। टिकटॉक के प्रशंसकों का कहना है कि इसकी वापसी भारत में शॉर्ट-वीडियो संस्कृति को फिर से जीवंत कर सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।
वैश्विक परिदृश्य: टिकटॉक का अन्य देशों में हाल
टिकटॉक को न केवल भारत में, बल्कि अन्य देशों में भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में टिकटॉक पर जनवरी 2025 में प्रतिबंध लगा था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बाइटडांस को ऐप बेचने के लिए अतिरिक्त समय दिया। नेपाल, ईरान, और अफगानिस्तान जैसे देशों ने भी टिकटॉक पर विभिन्न कारणों से प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें डेटा गोपनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा, और अनुचित सामग्री जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि, कुछ देशों में टिकटॉक ने स्थानीय नियमों का पालन करके प्रतिबंध हटवाने में सफलता पाई है। उदाहरण के लिए, इंडोनेशिया और पाकिस्तान ने टिकटॉक पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन सख्त सामग्री नियमन के बाद इन्हें हटा लिया गया। भारत में भी टिकटॉक के लिए यही रास्ता हो सकता है, लेकिन इसके लिए बाइटडांस को सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा।
टिकटॉक की वापसी के संभावित प्रभाव
यदि टिकटॉक भारत में वापसी (TikTok India comeback) करता है, तो यह सामग्री निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है। टिकटॉक ने भारत में शॉर्ट-वीडियो संस्कृति को जन्म दिया था, और इसकी अनुपस्थिति में कई नए मंच उभरे। लेकिन टिकटॉक का अनूठा एल्गोरिदम और स्थानीय सामग्री पर जोर इसे अन्य मंचों से अलग बनाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि टिकटॉक की वापसी ग्रामीण और छोटे शहरों के रचनाकारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है।
हालांकि, प्रतिबंध के बाद हुए नुकसान को भूलना मुश्किल है। कई सामग्री निर्माताओं ने अपनी आजीविका खो दी थी, और उन्हें नए मंचों पर अपनी पहचान फिर से स्थापित करनी पड़ी। टिकटॉक की वापसी इन रचनाकारों के लिए एक नई शुरुआत हो सकती है, लेकिन साथ ही यह डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाएगी।







