
वैश्विक उथल-पुथल में भारत-रूस संबंधों की मजबूती
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण फोन कॉल की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूसी तेल आयात को लक्षित करते हुए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया। यह कदम भारत और रूस के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव ने भारत को अपनी ऊर्जा नीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है। भारत सरकार ने अमेरिकी टैरिफ को “अनुचित और अस्वीकार्य” करार देते हुए कहा कि भारत का तेल आयात 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार आधारित निर्णयों पर निर्भर करता है। यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है, जो भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद रूस के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
रूसी तेल पर टैरिफ: भारत की आर्थिक चुनौतियां
इस भू-राजनीतिक तनाव के दौर में, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी टैरिफ को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अतार्किक” करार देते हुए कहा कि भारत के तेल आयात बाजार कारकों पर आधारित हैं और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। इस बयान ने भारत की स्वतंत्र नीति को रेखांकित किया, जो भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद रूस के साथ अपने समय-परीक्षित संबंधों को बनाए रखने की दिशा में अडिग है।
पुतिन ने इस कॉल के दौरान पीएम मोदी को यूक्रेन संघर्ष की ताजा स्थिति से अवगत कराया। मोदी ने भारत के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति लगातार रुख को दोहराया, जिसमें युद्धक्षेत्र पर किसी भी संघर्ष का समाधान असंभव होने की बात कही। यह भारत की तटस्थ और संतुलित नीति को दर्शाता है, जो भू-राजनीतिक तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
शांतिपूर्ण समाधान और द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
- अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया।
- भारत-रूस संबंध: पीएम मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
- यूक्रेन संघर्ष: पुतिन ने मोदी को यूक्रेन स्थिति पर जानकारी दी, जबकि भारत ने शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की।
- आगामी शिखर सम्मेलन: मोदी ने पुतिन को भारत में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।
सकारात्मक कदम के रूप में भारत-रूस साझेदारी:
मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय एजेंडे में प्रगति की समीक्षा की और इस साल के अंत में भारत में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन को आमंत्रित किया। यह निमंत्रण भू-राजनीतिक तनाव के बीच भी दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और सहयोग को दर्शाता है। रूस, जो यूक्रेन पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बन गया है, और भारत, जो रक्षा उपकरणों जैसे एस-400 सिस्टम के लिए रूस पर निर्भर है, ने अपनी साझेदारी को और गहरा करने का वादा किया।
इसके अलावा, यह कॉल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल की हाल की मॉस्को यात्रा के बाद हुई, जहां उन्होंने रूसी अधिकारियों के साथ ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा की। इस तरह के उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित करते हैं।
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति:
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने न केवल भारत, बल्कि ब्राजील जैसे अन्य देशों को भी प्रभावित किया है, जिन्हें ट्रम्प की टैरिफ नीति का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को, पीएम मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ फोन पर बात की, जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यह दर्शाता है कि भारत भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
ट्रम्प की नीति ने भारत को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है, जहां उसे ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि, भारत ने अपनी “मेक इन इंडिया” पहल को और तेज करने का फैसला किया है, जैसा कि पीएम मोदी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक रैली में कहा था, “हम केवल वही खरीदेंगे जो भारतीयों के पसीने से बना हो।” यह बयान भू-राजनीतिक तनाव के बीच आत्मनिर्भर भारत के प्रति दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
निष्कर्ष:
पीएम मोदी और पुतिन की यह बातचीत भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-रूस संबंधों की मजबूती का एक सकारात्मक संदेश देती है। अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद, भारत ने अपनी स्वतंत्र नीति को बनाए रखा है और रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का संकल्प लिया है। यह कॉल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की संतुलित और शांतिपूर्ण नीति को भी रेखांकित करता है।








