
भारत ने की शांति की अपील, युद्ध समाधान में सहयोग की पेशकश
भारत ने 15 अगस्त 2025 को अलास्का में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुप्रतीक्षित बैठक का स्वागत किया है। यह शिखर सम्मेलन यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है, और शांति स्थापना के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। इस मुलाकात से न केवल यूक्रेन में चार साल से जारी संघर्ष को समाप्त करने की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी नई संभावनाएं खुल रही हैं।
यूक्रेन युद्ध समाधान: वैश्विक समुदाय की नजरें अलास्का पर
यूक्रेन युद्ध, जो 2022 में शुरू हुआ, ने लाखों लोगों को विस्थापित किया और हजारों की जान ले ली। इस शिखर सम्मेलन से यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है। भारत ने इस मुलाकात को शांति की खिड़की खोलने वाला कदम बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत इस शिखर सम्मेलन का समर्थन करता है और यूक्रेन युद्ध समाधान के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने को तैयार है।” यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दोहराता है जिसमें वे लगातार शांति और कूटनीति पर जोर देते रहे हैं।
चुनौतियां और अवसर: क्या ट्रंप-पुतिन मुलाकात लाएगी बदलाव?
हालांकि यह शिखर सम्मेलन यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में आशा की किरण लेकर आया है, लेकिन कई चुनौतियां भी हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। दूसरी ओर, रूस ने क्रीमिया और अन्य कब्जाए गए क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में रखने की शर्त रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की बजाय अस्थायी युद्धविराम की ओर ले जा सकती है। फिर भी, भारत का मानना है कि संवाद के जरिए यूक्रेन युद्ध समाधान संभव है, और इस दिशा में कोई भी प्रगति स्वागत योग्य होगी।
भारत की भूमिका: शांति के लिए तटस्थ और सक्रिय दृष्टिकोण
भारत ने यूक्रेन युद्ध के प्रति हमेशा तटस्थ और संतुलित रुख अपनाया है। रूस से तेल आयात और यूक्रेन को मानवीय सहायता प्रदान करने के बीच भारत ने कूटनीति को प्राथमिकता दी है। इस शिखर सम्मेलन के संदर्भ में भारत ने न केवल इसका समर्थन किया है, बल्कि जरूरत पड़ने पर शांति सेना भेजने की संभावना पर भी विचार करने की बात कही है। यह दृष्टिकोण भारत की वैश्विक शांति स्थापना में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। यूक्रेन युद्ध समाधान में भारत की यह पहल वैश्विक मंच पर उसकी साख को और मजबूत करती है।
प्रमुख बिंदु:
- शिखर सम्मेलन का उद्देश्य: यूक्रेन युद्ध समाधान और शांति स्थापना।
- भारत का रुख: तटस्थ, संतुलित, और कूटनीति पर आधारित।
- मोदी का संदेश: “यह युद्ध का युग नहीं है।”
- चुनौतियां: यूक्रेन और रूस के बीच क्षेत्रीय और सामरिक मतभेद।
- संभावनाएं: अस्थायी युद्धविराम और दीर्घकालिक शांति की उम्मीद।
वैश्विक प्रभाव और भारत-अमेरिका संबंध
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात के लिए 25% टैरिफ लगाया है, जिसे बढ़ाकर 50% करने की चर्चा है। इसके बावजूद, भारत ने शांति के लिए अपने रुख को प्राथमिकता दी है। यह मुलाकात न केवल यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध, और अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग, इस मुलाकात को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
निष्कर्ष: शांति की ओर एक कदम
ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है। भारत का इस मुलाकात का स्वागत करना और शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा वैश्विक मंच पर उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच गहरे मतभेद चुनौतियां पेश करते हैं, लेकिन यह मुलाकात संवाद की शुरुआत है। जैसा कि भारत ने कहा, “कैसे भी हो, बस जंग रुकनी चाहिए।” इस शिखर सम्मेलन से यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठने की उम्मीद है, जो न केवल यूक्रेन और रूस, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।









