
भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद में तैनात भारतीय राजनयिकों और उनके परिवारों के लिए गैस, पानी और अख़बार जैसी बुनियादी सुविधाएं रोक दी गई हैं। बताया जा रहा है कि स्थानीय सप्लायर्स को पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा निर्देश दिया गया कि वे भारतीय उच्चायोग या उनके आवासों में कोई डिलीवरी न करें।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों मिशन स्टाफ पर निगरानी और उत्पीड़न भी बढ़ गया है। वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।
पृष्ठभूमि और कारण
यह विवाद पहलगाम आतंकी हमला, भारत का ऑपरेशन सिंदूर, और नई दिल्ली द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद उभरा है। हाल ही में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम संभवतः प्रतिशोध स्वरूप है।
क्या-क्या रोका गया है
- गैस सप्लाई – पाइपलाइन गैस और एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति रोकी गई।
- पानी – मिनरल और पैकेज्ड पानी के ठेके रद्द कराए गए, जिससे स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक समस्याएं खड़ी हुईं।
- अख़बार – स्थानीय समाचारों तक पहुंच बंद कर दी गई।
इससे पहले भी बिजली, इंटरनेट और अन्य सुविधाएं रोकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कानूनी पहलू
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस (1961) का उल्लंघन है, जिसमें यह प्रावधान है कि:
- मिशन के परिसरों की सुरक्षा और सम्मान हो (अनुच्छेद 22)
- मिशन के सुचारू संचालन के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं (अनुच्छेद 25)
- संचार के स्वतंत्र और सुरक्षित साधन उपलब्ध हों (अनुच्छेद 27)
भारत की संभावित प्रतिक्रिया
भारत, नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिकों की सुविधाएं सीमित कर सकता है, वीज़ा नियम सख्त कर सकता है या मामला संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर उठा सकता है।
भूराजनीतिक खतरे
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ‘टिट-फॉर-टैट’ (जैसे को तैसा) कार्रवाई दोनों देशों के बीच शत्रुतापूर्ण व्यवहार को सामान्य बना सकती है, जिससे भविष्य में तनाव कम करना मुश्किल हो जाएगा। अतीत में एयरस्पेस बंद करने जैसे कदमों को वापस लेने में सालों लग गए थे।
तनाव कम करने के उपाय
सीधी बातचीत, विश्वास बहाली के छोटे-छोटे कदम और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से स्थिति सुधारी जा सकती है।
निचोड़:
यह विवाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते कूटनीतिक टकराव का नया अध्याय है, जिसमें मानवीय, कानूनी और भू-राजनीतिक चिंताएं आपस में जुड़ गई हैं।








